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विश्व के प्रमुख संगठन और उनके मुख्यालय



1. रेडक्रॉस – जेनेवा
2. इंटरपोल (INTERPOL) – पेरिस (लेओंस)
3. एशियाई विकास बैंक (ADB) – मनीला
4. विश्व वन्य जीव संरक्षण कोष (WWF) – ग्लांड(स्विट्ज़रलैंड)
5. नाटो (NATO) – ब्रुसेल्स
6. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय – हेग
7. यूनिसेफ – न्यूयॉर्क
8. सार्क (SAARC) – काठमाण्डु
9. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) – नैरोबी
10. गैट (GATT) – जेनेवा
11. विश्व व्यापार संगठन (WTO) – जेनेवा
12. अमरीकी राज्यों का संगठन (OAS) – वाशिंगटन डी. सी.
13. अरब लीग – काहिरा
14. परस्पर आर्थिक सहायता परिषद् (COMECON) – मास्को
15. वर्ल्ड काउंसिल ऑफ़ चर्चेज (WCC) – जेनेवा
16. यूरोपीय ऊर्जा आयोग (EEC) – जेनेवा
17. अफ़्रीकी आर्थिक आयोग (ECA) – आदिस-अबाबा
18. यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ECTA) – जेनेवा
19. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR) – जेनेवा
20. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) – वियना
21. पश्चिमी एशिया आर्थिक आयोग (ECWA) – बगदाद
22. संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मलेन (UNCTAD) – जेनेवा
23. एमनेस्टी इंटरनेशनल – लंदन
24. अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक कमिटी (IOC) – लुसाने
25. यूरोपीय कॉमन मार्केट (ECM) – जेनेवा
26. राष्ट्रमंडलीय राष्ट्राध्यक्ष सम्मलेन (CHOGM) – स्ट्रान्सबर्ग
27. पेट्रोलियम उत्पादक देशों का संगठन (OPEC) – वियना
28. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) – पेरिस
29. यूरोपियन परमाणु ऊर्जा समुदाय (EURATON) – ब्रुसेल्स
30. राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) – लंदन
31. यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) – जेनेवा
32. यूरोपीय संसद – लक्जमबर्ग
33. यूरोपियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन (ESRO) – पेरिस
34. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) – जेनेवा
35. एशिया और प्रशांत क्षेत्रों का आर्थिक और सामाजिक आयोग – बैंकाक
36. अफ़्रीकी एकता संगठन (OAU) – आदिस-अबाबा
37. यूनेस्को – पेरिस
38. विश्व बैंक – वाशिंगटन डी. सी.
39. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) – वाशिंगटन डी. सी.
40. संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) – रोम


On Thu, 14 Nov, 2019, 6:52 AM Satish, <satishkumargvm1@gmail.com> wrote:
राष्ट्रपति शासन की संवैधानिक व्यवस्था
● राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 में दिए गए हैं. आर्टिकल 356 के मुताबिक राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं यदि वे इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों के मुताबिक काम नहीं कर रही है. ऐसा जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति उस राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही यह फैसला लें. यह अनुच्छेद एक साधन है जो केंद्र सरकार को किसी नागरिक अशांति जैसे कि दंगे जिनसे निपटने में राज्य सरकार विफल रही हो की दशा में किसी राज्य सरकार पर अपना अधिकार स्थापित करने में सक्षम बनाता है. संविधान में इस बात का भी उल्लेख है कि राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के दो महीनों के अंदर संसद के दोनों सदनों द्वारा इसका अनुमोदन किया जाना जरूरी है. यदि इस बीच लोकसभा भंग हो जाती है तो इसका राज्यसभा द्वारा अनुमोदन किए जाने के बाद नई लोकसभा द्वारा अपने गठन के एक महीने के भीतर अनुमोदन किया जाना जरूरी है.
बहुमत के अभाव में राष्ट्रपति शासन
________________________
जब किसी सदन में किसी पार्टी या गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत ना हो . राज्यपाल सदन को 6 महीने की अवधि के लिए 'निलंबित अवस्था' में रख सकते हैं. 6 महीने के बाद, यदि फिर कोई स्पष्ट बहुमत प्राप्त ना हो तो उस दशा में पुन: चुनाव आयोजित किए जाते हैं.
राष्ट्रपति शासन की अवधि
◆ यदि संसद के दोनों सदनों द्वारा राष्ट्रपति शासन का अनुमोदन कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति शासन 6 माह तक चलता रहेगा. इस प्रकार 6-6 माह कर इसे 3 वर्ष तक आगे बढ़ाया जा सकता है.
क्यों कहते हैं राष्ट्रपति शासन
◆इसे राष्ट्रपति शासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि, इसके द्वारा राज्य का नियंत्रण एक निर्वाचित मुख्यमंत्री की जगह सीधे भारत के राष्ट्रपति के अधीन आ जाता है. लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से राज्य के राज्यपाल को केंद्रीय सरकार द्वारा कार्यकारी अधिकार प्रदान किए जाते हैं. प्रशासन में मदद करने के लिए राज्यपाल सलाहकारों की नियुक्ति करता है, जो आम तौर पर सेवानिवृत्त सिविल सेवक होते हैं. आमतौर पर इस स्थिति में राज्य में केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी की नीतियों का अनुसरण होता है
क्या होते हैं बदलाव
★- राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रीपरिषद् को भंग कर देते हैं.
★- राष्ट्रपति, राज्य सरकार के कार्य अपने हाथ में ले लेते हैं और उसे राज्यपाल और अन्य कार्यकारी अधिकारियों की शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं.
★- राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति के नाम पर राज्य सचिव की सहायता से अथवा राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किसी सलाहकार की सहायता से राज्य का शासन चलाता है. यही कारण है कि अनुच्छेद 356 के अंतर्गत की गई घोषणा को राष्ट्रपति शासन कहा जाता है.
★- राष्ट्रपति, घोषणा कर सकता है कि राज्य विधायिका की शक्तियों का प्रयोग संसद करेगी.
★ - संसद ही राज्य के विधेयक और बजट प्रस्ताव को पारित करती है.
★ - संसद को यह अधिकार है कि वह राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति राष्ट्रपति अथवा उसके किसी नामित अधिकारी को दे सकती है.
★- जब संसद नहीं चल रही हो तो राष्ट्रपति, 'अनुच्छेद 356 शासित राज्य' के लिए कोई अध्यादेश जारी कर सकता है.

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