किसान_कल्ब

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय (Union Ministry of Agriculture and Farmers Welfare) के अनुसार 31 अक्तूबर, 2019 तक विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 24,321 सक्रिय किसान क्लब (Farmers Clubs) मौजूद थे।
नाबार्ड का एक अनौपचारिक मंच
फार्मर्स क्लब, नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (National Bank for Agriculture and Rural Development- NABARD) का एक अनौपचारिक मंच है।

पृष्ठभूमि

5 नवंबर, 1982 को नाबार्ड को राष्ट्र को समर्पित करते हुए भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने ‘क्रेडिट के माध्यम से विकास’ के पाँच सिद्धांतों’ को प्रचारित करने के लिये ‘विकास स्वयंसेवक वाहिनी’ (Vikas Volunteer Vahini-VVV) कार्यक्रम शुरू किया।
वर्ष 2005 में VVV कार्यक्रम को किसान क्लब कार्यक्रम (FCP) के रूप में नामांकित किया गया।

क्या है किसान क्लब?

किसान क्लब गाँव में किसानों का ज़मीनी स्तर का एक अनौपचारिक मंच है।
बैंकों और किसानों के पारस्परिक लाभ के लिये नाबार्ड के समर्थन एवं वित्तीय सहायता के साथ बैंकों की ग्रामीण शाखाओं द्वारा इस तरह के क्लबों का आयोजन किया जाता है।

उद्देश्य:

इन्हें बैंकों और किसानों के आपसी लाभ के लिये कार्यान्वित किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य किसानों के लिये तकनीकी के हस्तांतरण, साख (क्रेडिट) के माध्यम से विकास, जागरूकता और क्षमता निर्माण करना है।
फार्मर्स क्लब, बैंकों और राज्यों के संबंधित विभागों द्वारा प्रायोजित/कार्यान्वित कार्यक्रमों/योजनाओं के अभिसरण हेतु भी लाभदायक हैं।

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